Jai shri ram
भगवान श्रीराम सम्पूर्ण विश्व के एक महान आदर्श हैं और हिन्दुओं के तो वे सर्वस्व ही हैं। श्रीराम हिन्दू–जाति के तन,मन, प्राण ही नहीं–रोम–रोम में व्याप्त हैं और उन मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के अत्यंत प्रीति–भाजन हैं– पवनपुत्र श्री हनुमानजी। ये अंजनानन्दन अपने प्राणाराध्य श्रीराम के बिना एक क्षण भी नहीं रह पाते, इसी कारण जहां–जहां श्री सीताराम का मन्दिर है, वहां श्री हनुमान जी उनके रक्षक और सेवक के रूप में अवश्य उपस्थित मिलेंगे। यही हेतु है कि पवनकुमार से रहित श्री सीताराम का प्राय: कोई भी मन्दिर नहीं है और विद्या, बुद्धि, सत्य, तेज, वीरता, पराक्रम आदि के मूर्तस्वरूप, आदर्श–सेवक, आजन्म ब्रह्मचारी श्री हनुमान जी के प्रति हिन्दुओं में इतना आकर्षण, इतनी निष्ठा, इतनी श्रद्धा और इतनी भक्ति है कि सर्वथा स्वतंत्र रीति से भी वे श्री हनुमान जी की पूजा–अर्चना करते हैं वहां भक्त श्री सीताराम को श्री हनुमान के हृदय में अनुभव करते हैं। करूणावतार श्री हनुमान के मन्दिर उत्तर भारत में तो सर्वत्र हैं ही, दक्षिण–भारत में भी गांव–गांव में इनके मन्दिर हैं। श्री हनुमान जी बिना दक्षिण भारत में गांव की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इन संकटमोचन के मन्दिर इस आर्यधरा पर ही नहीं– जावा, सुमात्रा, इंडोनेशिया, थाईलैंड आदि देशों में भी पाये जाते हैं। भक्त प्राण–धन श्री हनुमान जी के प्रसिद्ध, प्राचीन व सिद्ध पावन स्थलों एवं मंदिरों का विवरण संक्षेप में देने का प्रयास–आनलाईन दर्शन शीर्षक के अन्तर्गत किया गया है। यह निश्चित है कि इससे रामभक्तों को श्री हनुमदुपासना की व्यापकता की एक झांकी अवश्य प्राप्त हो जायेगी।